ठहराव

 कभी सखु , कभी दुःुख; कभी दुःुख, कभी सखु । सखु -दुःुख का यह चक्र जीवन भर चलता रहता है। इन दोनों का आना- जाना जीवन भर लगा रहता है | वास्तव मेंसुख-द:ुख जीवन केदो महत्वपूर्णपहलूहैजो सदवै हमारेजीवन केसंग-संग चलतेरहतेहैं। मनष्ुय इन्हीं दोनों मस्िमतयों के बीच अपना जीवन व्यतीत करता है । ये दोनों ही मस्िमतयााँ मकसी हवा के झोंके की तरह सदैव जीवन में आती-जाती रहती हैं और हमारे जीवन पर अपना प्रभाव डालती हैं । जब जीवन मेंसब कुछ अच्छा होने लगता है; हम जो चाहते हैं वो हमें ममलने लगता है; हम जो काम करते हैं; उसमे हमें सफलता ममलती हैऔर हमारे आस-पास की पररमस्िमतयााँ हमारे प्रभाव से प्रभामवत से होती हैं । पररवार, ममत्र, ररश्तेदार, हर मकसी का हमें हर पल  साि ममलता है। उस समय हम ऐसा महससू करतेहैंमक हमारा जीवन सावन केमौसम मेंनत्ृय करतेउस मयरूकेसमान हैं 

मजसकेआसपास मक पररमस्िमतयााँउसके मन अनसुार हैजो उसेझमनेकेमलए उत्सामहत करती हैंऔर खमुियों केइन भावों के को लेकर हमारे िरीर के साि-साि हमारा मन भी झमता है। 

इसके मवपरीत, जब हमारे आसपास के पररमस्िमतयााँ हमारे सोच के मबल्कुल मवपरीत चलती हैं; हमारेमन केअनसुार कोई कायण नहीं होता; हम जो चाहते हैं वो हमें नहीं ममलता । हमारा बनता काम भी मबगड़ जाता है और सफलता हमसे  कोसों दरू जानेलगती है। उस समय हमारे सगे-सम्बन्धी, ममत्र, सािी; कोई हमारे साि नहीं रहता; हर कोई हमारा साि  छोड़ देता है; हमारी कोमििें भी मवफल होने लगती हैं; हमारेजीवन मेंकुछ भी अच्छा नहीं होता; मानो हमारा जीवन  पतझड़ केसूखेवक्षृ केसमान हो गया हो; मजस पर न तो पत्ते है, ना ही फल हैं, न ही मचमड़यों की चहचहाहट न ही कोई  बसेरा । 

इन पररमस्िमतयों मेंहमेंयह समझना जरूरी हैमक चाहेसुख हो अिवा दुःुख; दोनों में से कोई भी िाश्वत नहीं है; न ही कोई एक मस्िमत सदैव बनी रहती । दोनों ही मस्िमतयों में हमेिा पररवतणन होता रहता है । हमेंयह सोच कर स्वयंको अमभप्रेररत करना चामहए और उत्सामहत होना चामहए मक अभी दुःुख हैतो क्या हुआ; यह सदैव नहीं रहेगा । इसमलए दुःुख की मस्िमत में हमेंकभी मनराि नहीं होना चामहए क्योंमक यह समय सदा नहीं रहेगा । इसकेअलावा सुख की मस्िमत मेंहमें  जरुरत से ज्यादा उत्सामहत भी नहीं होना चामहए । अभी सखु हैतो दुःुख कभी नहीं आएगा; यह सोच कर हमें ज्यादा  प्रसन्न भी नहीं होना चामहए क्योंमक दोनों ही मस्िमतयों में पररवतणन होना अमनवायण है । 

अपने जीवन को अगर हम अच्छे से जीना चाहते हैं तो सखु -दुःुख पर ध्यान मदए बगरै हमें मनरंतर ही अपने कमण  पर ध्यान देना चामहए । हमारा कमण ही हमें हमेिा आगे बढ़ायेगा और जीवन की मवपरीत मस्िमतयों का सामना करके,  जीवन पि पर आगे बढ़ने में हमारी मदद करेगा । इसमलए हमें सदैव अपने कमण पर ध्यान देना चामहए और अपने कमण को  अपना धमणमान कर उसेमनरंतर करतेरहना चामहए और सखु -दुःुख केपमहयों पर सवार अपनेजीवन मेंसदैव संतुलन बनाकर कर आगे बढ़ते रहना चामहए । हमारेसमाज मेंऐसेबहुत सेउदाहरर् हैजो हमेंयह बतातेहैमक अगर हम जीवन की मवमभन्न पररमस्िमतयों को स्वयंपर हावी न होनेदेंऔर बस अपनेकमण पर ध्यान दें तो अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त  कर सकते हैं।
(लेखक – पवन कुमार ममश्रा) 

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